"चाय "
मच जाय 'हाय हाय '.
चाय की प्याली ,
आधी भरी है और आधी है खली.
बिना इस चाय ,
दिन न बीत जाय.
यह फैलती खुशबूदार हवा ,
कुछ के लिए काम करती जैसे दवा.
जब मिले चाय ,
बिस्किट हाथ में आ जाय.
अच्छी मित्रता निभाना ,
कहीं जहाँ से यह कही वापस न चले जाय.
फिर बहुत पड़ेगा पछताना ,
अगर यह तुमने नहीं जाना.
अथर्व शुक्ला
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